कांग्रेस के इतिहास में पहली बार गांधी परिवार की किसी सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा को किसी राज्य की उम्मीदवार चयन स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है. प्रियंका गांधी को असम स्क्रीनिंग कमेटी की जिम्मेदारी दी गई है.
पार्टी के भीतर इसे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा को सत्ता से हटाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जो गांधी परिवार के कड़े आलोचक रहे हैं. वहीं कुछ लोग इसे संगठन में प्रियंका गांधी की भविष्य की बड़ी भूमिका से भी जोड़कर देख रहे हैं. स्क्रीनिंग कमेटी की चेयरपर्सन के तौर पर प्रियंका गांधी का काम काफी संवेदनशील होगा.
उन्हें असम की सभी विधानसभा सीटों से संभावित उम्मीदवारों के नामों की जांच करनी होगी और योग्य उम्मीदवारों के नाम कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति यानी सीईसी को भेजने होंगे. अंतिम फैसला भले ही सीईसी लेती हो, लेकिन राज्य स्तर पर उम्मीदवारों को छांटने की अहम जिम्मेदारी स्क्रीनिंग कमेटी की ही होती है.प्रियंका गांधी के साथ सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को भी इस कमेटी में शामिल किया गया है.

पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को 126 में से 75 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस गठबंधन को 50 सीटें मिली थीं. वोट प्रतिशत की बात करें तो एनडीए को 43.9 प्रतिशत और कांग्रेस गठबंधन को 42.3 प्रतिशत वोट मिले थे. दोनों के बीच अंतर सिर्फ 1.6 प्रतिशत का था. इससे साफ है कि अगर विपक्षी दलों में बेहतर तालमेल हो और सही उम्मीदवार चुने जाएं, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है. कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि संसद और संगठन में प्रियंका गांधी की सक्रियता लगातार बढ़ रही है. असम स्क्रीनिंग कमेटी की जिम्मेदारी मिलने से उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है. इसे सिर्फ असम तक सीमित फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस में उनकी बड़ी भूमिका का संकेत भी माना जा रहा है.
कुल मिलाकर असम में प्रियंका गांधी की तैनाती सिर्फ चुनावी औपचारिकता नहीं, बल्कि कांग्रेस की एक रणनीति है. पार्टी युवा नेतृत्व, मजबूत संगठन और सही उम्मीदवार चयन के जरिए भविष्य की जमीन तैयार करना चाहती है. सत्ता परिवर्तन तुरंत हो या न हो, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस अब असम को हल्के में लेने के मूड में नहीं है.























